नीरज कुमार सिंह संवाददाता परसपुर गोंडा / Mon, Aug 17, 2026 / Post views : 15


परसपुर (गोंडा)। आजादी के करीब आठ दशक बाद भी पूरे पंडित गांव के ग्रामीण पक्की सड़क की सुविधा से वंचित हैं। करीब 15 घरों और 250 की आबादी वाले इस मजरे को ग्राम पंचायत मुख्यालय से जोड़ने के लिए अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। वर्ष 2021-22 में ग्राम प्रधान के प्रयास से पूरे पंडित से लोहंगपुर तक करीब एक किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क की पटाई कराई गई थी, लेकिन लंबे समय से मरम्मत और देखरेख न होने के कारण मार्ग जगह-जगह टूटकर दलदल और कीचड़ में तब्दील हो गया है। बारिश के दिनों में इस रास्ते से गुजरना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

जनकवि अदम गोंडवी ने अपनी रचनाओं में गांव, गरीब और आम आदमी की समस्याओं को जिस बेबाकी से सामने रखा, पूरे पंडित गांव की मौजूदा तस्वीर उनकी उन पंक्तियों को चरितार्थ करती नजर आती है। “महज़ सड़कों पे गड्ढे हैं, न बिजली है न पानी है, हमारे शहर गोंडा की फ़िज़ा कितनी सुहानी है।” गांव की बदहाल सड़क और बारिश में पसरी कीचड़ ग्रामीणों की बुनियादी सुविधाओं की हकीकत बयां कर रही है।

इसी तरह अदम गोंडवी की पंक्ति “तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।” भी यहां की स्थिति पर सटीक बैठती है। कागजों में गांवों के विकास और बेहतर आवागमन की तस्वीर भले ही दिखाई दे, लेकिन पूरे पंडित गांव के ग्रामीण आज भी पक्की सड़क के लिए इंतजार कर रहे हैं। बारिश के दिनों में कीचड़ और जलभराव के बीच ग्रामीणों का आवागमन यह बताने के लिए काफी है कि जमीनी हकीकत क्या है।

पूरे पंडित से लोहंगपुर होकर जाने वाला यह मार्ग आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। प्योली, पूरे बिलंद, कटैला और डिगंबरपुरवा समेत कई गांवों के लोग इसी रास्ते से त्यौरासी और बालपुर आते-जाते हैं। वहीं डेहरास से त्यौरासी, डोमाकल्पी, लोहंगपुर और बालपुर जाने वाले ग्रामीण भी दूरी कम होने के कारण इस मार्ग का शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। स्कूली बच्चों के लिए भी यह प्रमुख रास्ता है। बारिश के बाद मार्ग पर जलभराव और कीचड़ जमा हो जाने से पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। आए दिन लोग फिसलकर गिरते है। बच्चों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनकी किताब-कापियां भी खराब हो जाती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। उनका कहना है कि जब गांवों के विकास और सुविधाओं की बात होती है तो सबसे पहले बेहतर सड़क और आवागमन की जरूरत होती है। पक्की सड़क बनने से न केवल पूरे पंडित गांव के लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि प्योली, पूरे बिलंद, कटैला, डिगंबरपुरवा, त्यौरासी, बालपुर और आसपास के अन्य गांवों के लोगों को भी आवागमन में सुविधा होगी।

बीडीओ रामलगन वर्मा ने कहा कि मार्ग की स्थिति की जानकारी लेकर नियमानुसार सड़क निर्माण के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण बड़कू गुप्ता, अवशेष, राकेश, राजू, कक्कू समेत अन्य लोगों ने प्रशासन से जल्द मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराकर पक्की सड़क बनवाने की मांग की है।
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