धीरेश त्रिवेदी लखनऊ संवाददाता / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 141
शेखर न्यूज लखनऊ उत्तर प्रदेश
युद्ध मानवता के लिए सबसे विनाशकारी घटना है, जो भारी जान-माल की हानि, आर्थिक तबाही, और गहरे मनोवैज्ञानिक आघात का कारण बनती है। इसमें न केवल सैनिक, बल्कि नागरिक भी मारे जाते हैं, बुनियादी ढांचा (स्कूल, अस्पताल) नष्ट होता है और पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचता है, जो पीढ़ियों तक समाज को जकड़े रहता है।
युद्ध के प्रमुख विनाश और नुकसानः
मानवीय क्षति (Human Loss): लाखों की जान जाना, स्थायी
विकलांगता, और परिवारों का बिखर जाना। युद्ध के कारण लोग मानसिक आघात, डर और अवसाद (PTSD) का शिकार होते हैं।
आर्थिक तबाही (Economic Ruin): देश की अर्थव्यवस्था पूरी
तरह चरमरा जाती है। कृषि, उद्योग और व्यापार ठप होने से गरीबी और भुखमरी बढ़ती है।
बुनियादी ढांचे का विनाश (Infrastructure Destruction): शहर, गाँव, पुल, स्कूल और अस्पताल मलबे में तब्दील हो जाते हैं।
शरणार्थी संकट (Refugee Crisis): आम नागरिक अपने ही देश
में या दूसरे देशों में शरणार्थी बनने को मजबूर हो जाते हैं।
पर्यावरणीय क्षति (Environmental Damage): विस्फोटों,
रसायनों और आग से वनों, जल स्रोतों और मिट्टी का भारी नुकसान होता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) नष्ट हो जाता है।
सांस्कृतिक विरासत का विनाश (Cultural Destruction): ऐतिहासिक इमारतें, संग्रहालय और पुरातात्विक स्थल नष्ट कर दिए जाते हैं, जो किसी देश की पहचान होते हैं।
युद्धों से होने वाले विनाश, जनहानि और नकारात्मक परिणामों पर महापुरुषों और विचारकों के कथन इस बात की गवाही देते हैं कि हिंसा कभी भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। युद्धों के विनाशकारी परिणामों पर कुछ प्रमुख महापुरुषों के विचार नीचे दिए गए हैं:
महात्मा गांधी: "आँख के बदले आँख का सिद्धांत पूरी दुनिया को अंधा बना देगा"। गांधीजी ने हमेशा अहिंसा और शांति का समर्थन किया, क्योंकि उनका मानना था कि युद्ध केवल विनाश लाता है।
अटल बिहारी वाजपेयीः "युद्धों से तो सदा विनाश ही हुआ है, नेतापढ़ लें विश्व के, युद्धों का इतिहास; रोती मानव सभ्यता, करती हाहाकार"। (युद्धों की निरर्थकता को रेखांकित करते हुए)।
रामधारी सिंह दिनकर (कुरुक्षेत्र): "युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वेभी बड़े अभागे होंगे। या तो प्रण को तोड़ा होगा या फिर रण को छोड़ा होगा"। (यह युद्ध की विभीषिका के बीच कर्तव्य की बात करता है, लेकिन युद्ध की विभीषिका को भी दर्शाता है)।
अर्नस्ट हेमिंग्वेः "प्रथम विश्व युद्ध अब तक का सबसे भीषण, हत्यारा और कुप्रबंधित कत्लेआम था जो पृथ्वी पर हुआ है"।
बट्रेंड रसेलः युद्ध के कारणों पर चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि हम अक्सर अपने दुखों का कारण किसी और को मानते हैं और युद्ध की राह चुनते हैं, जो केवल और अधिक विनाश लाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन